INR Vs PKR: 1947 से आज तक रुपया और पाकिस्तानी रुपया कैसे बदले

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INR Vs PKR: 1947 से आज तक रुपया और पाकिस्तानी रुपया कैसे बदले भारत और पाकिस्तान 1947 में आज़ादी के बाद बने। दोनों देशों की शुरुआत लगभग एक जैसी थी। उस समय भारत और पाकिस्तान दोनों जगह ब्रिटिश इंडियन रुपया ही चलता था। लेकिन जैसे-जैसे दोनों देशों ने अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था को अलग से चलाना शुरू किया, वैसे-वैसे उनकी करेंसी का सफर भी अलग हो गया। आज हम देखेंगे कि 1947 से लेकर 2025 तक भारतीय रुपया (INR) और पाकिस्तानी रुपया (PKR) एक-दूसरे के मुकाबले कैसे खड़े रहे।

INR Vs PKR में शुरुआत

INR Vs PKR आजादी के समय भारत और पाकिस्तान दोनों की करेंसी लगभग बराबर थी। उस समय 1 भारतीय रुपया = 1 पाकिस्तानी रुपया के बराबर था। दोनों देशों की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित थी और औद्योगिक विकास भी धीरे-धीरे हो रहा था।

1950 और 1960 का दशक

INR Vs PKR 1950 के दशक में भारत ने अपनी योजना आधारित अर्थव्यवस्था पर काम शुरू किया। बड़े-बड़े उद्योग, बांध और फैक्ट्रियां बनीं। पाकिस्तान में भी शुरुआती दौर में अर्थव्यवस्था अच्छी चली, खासकर 1960 के दशक में पाकिस्तान को “विकासशील देशों का मॉडल” माना जाने लगा। लेकिन दोनों देशों की करेंसी तब भी लगभग बराबरी पर थी।

1970 का दशक

INR Vs PKR 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के बनने के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा। वहीं भारत ने भी 1970 के दशक में कई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। इस दौरान धीरे-धीरे भारतीय रुपया और पाकिस्तानी रुपया के बीच फर्क दिखने लगा।

1980 और 1990 का दौर

INR Vs PKR 1980 के दशक तक भारत ने धीरे-धीरे अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर किया। जबकि पाकिस्तान कर्ज़ पर निर्भर होता गया। 1990 के दशक में भारत ने आर्थिक सुधार (Economic Reforms 1991) किए, विदेशी निवेश बढ़ा, आईटी सेक्टर उभरा और निर्यात तेज़ी से बढ़ा। इसके चलते भारतीय रुपये ने मजबूती हासिल की। दूसरी ओर पाकिस्तान IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) और विश्व बैंक के कर्ज़ पर चलता रहा। इसका असर उनकी करेंसी पर पड़ा और PKR धीरे-धीरे INR से कमजोर होने लगा।

2000 से 2010 का समय

INR Vs PKR 2000 के दशक में भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ी। आईटी सेक्टर, सर्विस इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग में बूम आया। रुपये की वैल्यू स्थिर रही।
पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद की वजह से निवेश घटा और महंगाई बढ़ी। इस कारण पाकिस्तानी रुपया भारतीय रुपये के मुकाबले और नीचे चला गया।

2010 से 2020

INR Vs PKR भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया। विदेशी निवेश, स्टार्टअप कल्चर और टेक्नोलॉजी ने रुपया को मजबूत रखा। पाकिस्तान की स्थिति इसके विपरीत रही। उन्हें लगातार विदेशी कर्ज़ लेना पड़ा और महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ी। PKR की वैल्यू गिरती रही।

2025 में स्थिति

आज (2025) हालात ये हैं कि 1 भारतीय रुपया लगभग 3.3 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है। यानी अगर आपके पास 100 भारतीय रुपये हैं तो पाकिस्तान में उसकी कीमत 330 पाकिस्तानी रुपये के बराबर होती है।

क्यों INR मजबूत और PKR कमजोर?

  1. आर्थिक नीतियां: भारत ने 1991 के बाद से सही आर्थिक सुधार किए।
  2. विदेशी निवेश: भारत में आईटी, ऑटोमोबाइल और सर्विस सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ा।
  3. राजनीतिक स्थिरता: भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था ने अर्थव्यवस्था को संभाला।
  4. पाकिस्तान की समस्याएं: पाकिस्तान बार-बार IMF से कर्ज़ लेता रहा, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से निवेशक दूर होते रहे।

नतीजा

आजादी के समय दोनों देशों की करेंसी बराबर थी। लेकिन आज भारतीय रुपया पाकिस्तान के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत है। यह सिर्फ करेंसी का फर्क नहीं बल्कि दोनों देशों की आर्थिक यात्रा की कहानी है। भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे सुधार कर मजबूती दी, जबकि पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और कर्ज़ के जाल में फंसा रहा।

निष्कर्ष

INR Vs PKR 1947 से आज तक का सफर बताता है कि कैसे सही नीतियां, निवेश और स्थिरता किसी देश की करेंसी को मजबूत बना सकती हैं। आज भारत एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है, जबकि पाकिस्तान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यही वजह है कि INR और PKR के बीच इतना बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

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